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03-Oct-2017

श्री गणेश आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। 
आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

भगवान श्रीगणेश की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

जय गणेश देवा।

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
मस्तक सिंदूर सोहे मुसे की सवारी।।

जय गणेश देवा।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूअन का भोग लागे संत करे सेवा।।

जय गणेश देवा।

अंधन को आंख देत कोढिन को काया
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।

जय गणेश देवा।

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।।

जय गणेश देवा।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

जय गणेश देवा।

विघ्नहरण मंगलकरण, काटन सकल क्लेश।
सबसे पहले सुमरिए गौरी-पुत्र गणेश।।

जय गणेश देवा।

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