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03-Oct-2017

स्मार्टफोन पर नहीं चला पीएम मोदी के

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मेक इन इंडिया' का नारा देकर देश में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी जा सके और बड़ी नौकरियां पैदा की जा सकें। लेकिन, इंडस्ट्री के टॉप अधिकारियों का कहना है कि स्किल्ड लेबर और पार्ट्स सप्लायर्स की कमी के साथ-साथ जटिल टैक्स व्यवस्था के कारण भारत का स्मार्टफोन पावरहाउस बनने का सपना चूर-चूर हो रहा है। हालांकि खबरें यहां तक आई थीं कि ऐपल भारत में आईफोन बनाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि मेक इन इंडिया की लॉन्चिंग के तीन साल बाद भारत में सिर्फ आयातित उपकरणों को असेंबल कर फोन बनाए जा रहे हैं। 

ठेके पर फोन मैन्युफैक्चर करनेवाली फॉक्सकॉन टेक्नॉलजी और फ्लेक्सट्रॉनिक्स कॉर्प जैसी कंपनियों ने भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाई हैं, लेकिन चिप सेट्स, कैमरा और अन्य दूसरे कीमती उपकरण भारत में अब भी नहीं बन रहे। ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन महाराष्ट्र में एक इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट लगानेवाली थी, लेकिन उसने भी कदम वापस खींच लिए। स्थानीय अधिकारियों ने साल 2015 में कहा था कि फॉक्सकॉन के आने से 50,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

टेक रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के मुताबिक, चूंकि बना-बनाया फोन आयात करने पर टैक्स लगता है, इसलिए विदेशों से उपकरण मंगवाकर यहां असेंबल कर लिए जाते हैं जबकि भारत में बन रहे फोन कंपोनेंट्स सिर्फ हेडफोन और चार्जर तक ही सीमित हैं जिनकी कीमत फोन की कुल कीमत के 5 प्रतिशत तक ही होती है।

एक चाइनीज स्मार्टफोन बनानेवाली कंपनी के सीनियर एग्जिक्युटिव ने कहा, 'भारत ऐसी जगह है जहां हमें मोबाइल फोन बनाना चाहिए, यह सोचने की जगह हमें यह लगता है कि यह ऐसी जगह है जहां हमें फोन असेंबल करने की जरूरत है क्योंकि यहां कंपोनेंट्स मंगवाकर आयात करने पर कम टैक्स लगता है।' इस अधिकारी ने बिजनस को नुकसान पहुंचने के डर से अपनी पहचान उजागर करने से इनकार कर दिया।

टैक्स विवाद
इंडस्ट्री के कई अधिकारी मेक इन इंडिया की नाकामयाबी की वजह कुशल इंजिनियरों और स्थानीय स्तर पर उपकरण बनानेवाली कंपनियों की कमी भी बताते हैं। वे भारत सरकार और नोकिया जैसी विदेशी कंपनियों के साथ टैक्स विवाद का भी हवाला देते हैं। ध्यान रहे कि नोकिया ने दक्षिण भारत में अपना मोबाइल हैंडसेट प्रॉडक्शन यूनिट लगाने की योजना टाल दी।

हाल ही में दिल्ली में आयोजित पहली इंडिया मोबाइल कांग्रेस में इंडस्ट्री के एक सूत्र ने रॉयटर्स से कहा, 'जब कोई यहां आने की कोशिश करता है तो नोकिया के निकलने की बात उसके ध्यान में आ जाती है।' इसके अलावा, जीएसटी की भी अपनी चुनौतियां हैं, मसलन टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया आदि। पिछले सप्ताह भी भारत सरकार ने जनरल इलेक्ट्रिक के साथ साल 2015 के करार में संभावित बदलाव की घोषणा की। 

चरणबद्ध योजना
सरकार का कहना है कि उसके पास देश में फोन मैन्युफैक्चरिंग को धीरे-धीरे बढ़ावा देने का कार्यक्रम है। उसका लक्ष्य हर साल स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण की है। टेलिकॉम सेक्रटरी अरुणा सुंदरराजन ने संवाददाताओं से कहा, 'हमने मोबाइल असेंबलिंग से शुरुआत कर दी है और अब हम वैल्यू चेन को बढ़ाना चाहते हैं। कई निवेशकों ने इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई है।' 

दरअसल, फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम पिछले साल 2016 में शुरू हो गया और अब फोन चार्जर एवं बैटरी बनानेवाली कंपनियां 2020 तक ज्यादा कीमती उपकरण बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। सुंदरराजन ने कहा कि सरकार निवेशकों को पर्याप्त भरोसा दिलाना चाहती है। 

http://navbharattimes.indiatimes.com/business
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 Pankaj Lamba 19-Jan-2018 12:13 PM
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